Wednesday, January 5, 2011

पाँच


स्याह कारनामों के कारखाने खुले हैं। 
कालिख में रहकर भी वे दूध के धुले हैं।
देखो भाई उनसे कोई क्वेश्चन न करना
जानते नहीं! वे क्षीरसागर से निकले हैं।।



4 comments:

  1. nataon par krara vyngay
    ho ske to word verificatin hta den , tippni karni saral hogi .
    --- sahityasurbhi.blogspot.com

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  2. आज पहली बार इस ब्लॉग पर आना हुआ ....क्षणिकाओं में गज़ब की सोच है ..हर क्षणिका बहुत कुछ कहती हुई ...

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  3. आदरणीया गीत जी धन्यवाद!
    कलरव पर आने एवं उत्साहवर्द्धन के लिये।

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  4. Bahut accha laga
    thankyou
    to join me

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