कलरव
नीरवता, निःशब्द, जड़ता, स्तब्धता एवं तटस्थता के बीच कलरव................ताकि गति बनी रहे।
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Wednesday, January 5, 2011
पाँच
स्याह कारनामों के कारखाने खुले हैं।
कालिख में रहकर भी वे दूध के धुले हैं।
देखो भाई उनसे कोई क्वेश्चन न करना
जानते नहीं! वे क्षीरसागर से निकले हैं।।
Tuesday, January 4, 2011
चार
फोटो, साभार-गूगल
कहा तक्षक ने, जनमेजय से,
क्यों व्यर्थ पड़े हो मेरे पीछे,
हम तो व्यर्थ ही बदनाम हैं।
चित्रगुप्त की लिस्ट में,
मुझसे पहले भी कई नाम हैं॥
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