Thursday, February 17, 2011

छः

धधक रही जिस उर में ज्वाला
उसको खूब धधकने दो।
परिवर्तन की बात जो करता
उसको मन भर बकने दो॥
टकराते हैं हम नित प्याला
मदिरा खूब छलकने दो।
राजनीति की बात है भाई
रुको, रोटियाँ सिंकने दो॥

Wednesday, January 5, 2011

पाँच


स्याह कारनामों के कारखाने खुले हैं। 
कालिख में रहकर भी वे दूध के धुले हैं।
देखो भाई उनसे कोई क्वेश्चन न करना
जानते नहीं! वे क्षीरसागर से निकले हैं।।



Tuesday, January 4, 2011

चार


फोटो, साभार-गूगल
कहा तक्षक ने, जनमेजय से,
क्यों व्यर्थ पड़े हो मेरे पीछे,
हम तो व्यर्थ ही बदनाम हैं।
चित्रगुप्त की लिस्ट में,
मुझसे पहले भी कई नाम हैं॥

Sunday, January 2, 2011

तीन


वे करते रहे वादा

उन्हें होता रहा फायदा।


पूरे साल गढ़ते रहे


नया-नया कायदा।।